मौसम की ये पहली बारिश
बे-ग़ैरत मनमौजी बारिश
बाकी सब को भाती है पर
मुझ को तो तड़पाती बारिश
मुझ को दुश्मन सी लगती है
तेरे तन को छूती बारिश
चाहत है बस बरसे हरदम
मुझ पे तेरे लब की बारिश
— Sachin kumar
बे-ग़ैरत मनमौजी बारिश
बाकी सब को भाती है पर
मुझ को तो तड़पाती बारिश
मुझ को दुश्मन सी लगती है
तेरे तन को छूती बारिश
चाहत है बस बरसे हरदम
मुझ पे तेरे लब की बारिश
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