अगर कहीं भी मिले मुहब्बत ज़रा सा बचना सराब होगी
ख़ुशी से दूरी बनाये रखना नहीं तो आदत ख़राब होगी
ये कैसे हमने शजर थे पाऐ कि ज़ीस्त भर सिर्फ़ ख़ार आऐ
जो तुम मिले तो लगा कि शायद ये ज़िंदगी अब गुलाब होगी
वो सुरमई नीली आँखें पीछे नक़ाब के क्या ग़ज़ब किए थीं
ये सोचो क्या होगा उसका जिसके लिए वो जब बे-नक़ाब होगी
शराब को ये ग़ुरूर है वो जिसे भी छू ले बने शराबी
कभी तुम्हारे लबों ने छू ली नशे में उस दिन शराब होगी
ये आज कल के नऐ दिवाने दो चार जुमले लिखेंगे तुम पर
मगर असद जब लिखेगा तुमको तो कम से कम इक किताब होगी
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