gulon ko shaakh se todo to haal mat poochho | गुलों को शाख़ से तोड़ो तो हाल मत पूछो

  - Asad Akbarabadi

गुलों को शाख़ से तोड़ो तो हाल मत पूछो
जवाब सुन न सकोगे सवाल मत पूछो

हर एक ज़ख़्म को मालूम है ख़ता उसकी
सो आख़िरश है इन्हें क्या मलाल मत पूछो

अभी तो उड़ने लगा था ये दिल परों के बग़ैर
ज़रा तुम उठ के चले और ज़वाल मत पूछो

थी खामियाँ मेरी जितनी भी सब बता दूँगा
बस उनका ज़िक्र ख़बर हाल चाल मत पूछो

दराज़ बाल नज़र तेज़ और लबों पर तिल
कहाँ कहाँ पे था क्या क्या जमाल मत पूछो

इसी महीने में शादी हुई है उसकी असद
न जाने कैसे बसर होगा साल मत पूछो

  - Asad Akbarabadi

Nazar Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Asad Akbarabadi

As you were reading Shayari by Asad Akbarabadi

Similar Writers

our suggestion based on Asad Akbarabadi

Similar Moods

As you were reading Nazar Shayari Shayari