कोरे छोड़ के कारे पन्ने फाड़ दिए
आँसू से तर ख़ारे पन्ने फाड़ दिए
दर्द में इतनी लज़्ज़त थी रा'नाई थी
जितने भी थे प्यारे पन्ने फाड़ दिए
मैं बस उसका अक़्स मिटाने बैठा था
इक इक करके सारे पन्ने फाड़़ दिए
हर पन्ने को अपना बीज दिखाना था
जो निकले बंजारे पन्ने फाड़ दिए
लिखना था मज़लूम हैं कितने लोग असद
ग़ुस्से में बेचारे पन्ने फाड़ दिए
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