बा-वज़ू पुर-फ़िदाक दिल अपना
हम चले कर के पाक दिल अपना
सोचता है कि ज़ीस्त तर्क करे
क्या करे कर्ब-नाक दिल अपना
दिल लगाने को चाहिए इक दिल
कैसे लग जाए ख़ाक-दिल अपना
खा रही है मलूलियत हमको
हो गया है ख़ुराक-दिल अपना
वो भी सूरत ही देखती होगी
यूँँ तो है ठीक ठाक दिल अपना
ख़ूब-रू जब पलट गई तौबा
हमने थामा तपाक दिल अपना
यूँँ तो रखता है ज़ौक़े-मर्ग असद
फिर भी सीता है चाक-दिल अपना
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