yuñ dekha bhi jaa.e to kispe bahut hai | यूँँ देखा भी जाए तो किसपे बहुत है

  - Asad Akbarabadi

यूँँ देखा भी जाए तो किसपे बहुत है
भले फ़न ज़रा हो अगरचे बहुत है

यहाँ किसको फ़ुर्सत है पानी भी पूछे
वो आया तो दो पल को मिलने बहुत है

कि बूढ़ी नज़र को नहीं चाहिए कुछ
निकलते में हँस कर नमस्ते बहुत है

वो पत्तल की दावत की रस्म-ओ-रवायत
अभी क्या लिया है अरे रे बहुत है

परेशान क्यूँ है मैं हूँ तो तेरे साथ
कोई प्यार से यूँँ भी कह दे बहुत है

ये हिचकी असद ख़ुशनसीबी है तेरी
किसी को कोई याद कर ले बहुत है

  - Asad Akbarabadi

Nigaah Shayari

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