यूँँ देखा भी जाए तो किसपे बहुत है
भले फ़न ज़रा हो अगरचे बहुत है
यहाँ किसको फ़ुर्सत है पानी भी पूछे
वो आया तो दो पल को मिलने बहुत है
कि बूढ़ी नज़र को नहीं चाहिए कुछ
निकलते में हँस कर नमस्ते बहुत है
वो पत्तल की दावत की रस्म-ओ-रवायत
अभी क्या लिया है अरे रे बहुत है
परेशान क्यूँ है मैं हूँ तो तेरे साथ
कोई प्यार से यूँँ भी कह दे बहुत है
ये हिचकी असद ख़ुशनसीबी है तेरी
किसी को कोई याद कर ले बहुत है
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