कहानी हो मुकम्मल, तुम अगर किरदार हो जाओनिगाहों में उलझते हो, ज़रा दिलदार हो जाओकहानी है हमारी भी, कहानी है तुम्हारी भीअगर विस्तार मैं हूँ तो मिरा तुम सार हो जाओ— Vivek Vistar