वो अपनों की तरह मुझ को सुनाई क्यूँ नहीं देताखफ़ा बैठा है वो मुझ से दुहाई क्यूँ नहीं देताउड़ाता बातें हैं अक्सर जो मिलता है किसी से ख़ैरबुरा हूँ मैं अगर इतना जुदाई क्यूँ नहीं देता— Vikas jain "vyakul"