apni haalat ka bura haal ki.e baitha hooñ | अपनी हालत का बुरा हाल किए बैठा हूँ

  - ALI ZUHRI

अपनी हालत का बुरा हाल किए बैठा हूँ
मैं उदासी को जवानी भी दिए बैठा हूँ

तेरी यादों में मुझे होश कहाँ रहता है
कोई देखे तो ये समझे के पिए बैठा हूँ

ज़िंदगी है मेरी ज़ख़्मों की कहानी जानाँ
साया-ए-दर्द में इक 'उम्र जिए बैठा हूँ

दोस्ती 'इश्क़ मोहब्बत हैं रिवाजों के चलन
कितने रिश्तों का भरम दिल में लिए बैठा हूँ

कैसे हाथों की लकीरें भी बदल जाती हैं
ये तजुर्बा भी कहानी का किए बैठा हूँ

अब तो आ जाए मेरी मौत मुझे लेने को
अब तो मैं जान हथेली पे लिए बैठा हूँ

ख़ुद को खोकर के मिला है मुझे ज़ुहरी का पता
अपने अंदर में 'अजब शख़्स लिए बैठा हूँ

  - ALI ZUHRI

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