"दोस्त"
ये बात तुझ से छुपी नहीं
तू रूह है मेरी साया नहीं
तू ने ये कैसे कह दिया
तू दोस्त है हम सफ़र नहीं
क्यूँ तुझे आता समझ नहीं
तू राह है मेरी मंज़िल नहीं
— ALI ZUHRI
ये बात तुझ से छुपी नहीं
तू रूह है मेरी साया नहीं
तू ने ये कैसे कह दिया
तू दोस्त है हम सफ़र नहीं
क्यूँ तुझे आता समझ नहीं
तू राह है मेरी मंज़िल नहीं
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