
मेरी ख़ामोशियों में भी फ़साना ढूँढ़ लेती है
बड़ी शातिर है ये दुनिया बहाना ढूँढ़ लेती है
हक़ीक़त ज़िद किए बैठी है चकनाचूर करने को
मगर हर आँख फिर सपना सुहाना ढूँढ़ लेती है
— Yaduvanshi Shubham
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