चराग़-ए-मोहब्बत जलाया किसी ने
उसी को मगर फिर बुझाया किसी ने
बना के मुझी से सभी रिश्ते नाते
मुझे ही पराया बताया किसी ने
किसी ने बढ़ाया था दर्जे को मेरे
बढ़ाकर उसे फिर घटाया किसी ने
किसी ने हँसाया था मुझ को रुला के
हँसा के मुझे फिर रुलाया किसी ने
रखे ही थे तेरे लबों पर मेरे लब
मुझे नींद से तब जगाया किसी ने
— Khudgarzz Yogesh















