क़दम बढ़ाए गए जब भी ज़िंदगी की तरफ़
किसी ने खींच लिया हम को शा'इरी की तरफ़
ये लोग आप को ज़िंदा जला भी सकते हैं
अगरचे बढ़ते रहे यूँ ही रौशनी की तरफ़
कोई सदा भी मेरे कान तक न पहुँचेगी
पहुँच गया मैं अगर अपनी ख़ामुशी की तरफ़
हर इक ख़याल से आया मुझे ख़याल तेरा
हर इक गली से मैं पहुँचा तेरी गली की तरफ़
— ZARKHEZ















