छुप के दीदार बहुत करता हैमुझ को बेज़ार बहुत करता हैप्यार वो रात-गए करता हैदिन में तकरार बहुत करता हैकाम करता है सभी मेरा परपहले इनकार बहुत करता हैमेरे झुमके के लिए वो घर कोख़ास-बाज़ार बहुत करता है— Shubham Rai 'shubh'