कि दर्द-ए-सुख़न गुनगुनाते हुएज़रा ठहरा तुझ को सुनाते हुएसभी पीर समझे मिरा इस लिएतुझे गाया है बुदबुदाते हुए— Shubham Rai 'shubh'