यहाँ तो न पेड़ है न साया
न घर है न घर में रहने वाले
न ज़िंदगी है न कोई हलचल
यहाँ तो ता-हद्द-ए-नज़र
धूप ही धूप है
रेत ही रेत है
धूप ही धूप है
तन को झुलसाती धूप
आग बरसाती धूप
धूल उड़ाती धूप
रेत उड़ाती एक दम पराई धूप
— Aabid Adeeb
न घर है न घर में रहने वाले
न ज़िंदगी है न कोई हलचल
यहाँ तो ता-हद्द-ए-नज़र
धूप ही धूप है
रेत ही रेत है
धूप ही धूप है
तन को झुलसाती धूप
आग बरसाती धूप
धूल उड़ाती धूप
रेत उड़ाती एक दम पराई धूप
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