जिस्म से दर्द जब जुदा होगा
मुझ
में तब कुछ नहीं बचा होगा
कुछ नहीं कहता अब किसी से जो
कितना कुछ कहना चाहता होगा
जानते हो तुम्हीं पता मेरा
तुम को तो ख़ैर ये पता होगा
मिलने का एक बार तो मुझ से
मन तुम्हारा भी तो किया होगा
तुम ने वा'दा किया था जाते वक़्त
लौटते वक़्त राब्ता होगा
— Abhay Aadiv















