ख़ताओं की मुआ'फ़ी चाहता हूँमता-ए-जाँ तुम्हारा नाम क्या हैअजब नश्शा हैं आँखों में तुम्हारीनज़र भर देख लो तो जाम क्या है— Ajeetendra Aazi Tamaam