tamaam nekiyaan dariyaa men daalne ke li.e | तमाम नेकियाँ दरिया में डालने के लिए

  - Aadarsh Dubey

तमाम नेकियाँ दरिया में डालने के लिए
निकल पड़े हैं समुन्दर खंगालने के लिए

सितम तो ये है के तेशा नहीं मिला हम को
पहाड़ काट के रस्ता निकालने के लिए

न जाने कितनों की क़ीमत गिरायी जाती है
अमीरे शहर की क़ीमत उछालने के लिए

हम ऐसे लोगों को लाया गया है दुनिया में
कुएं में कूद के सिक्का निकालने के लिए

किसी के हिज्र की हम आग पीते रहते हैं
सुलगते लफ़्ज़ों को ग़ज़लों में ढालने के लिए

ज़रा संभालना आ जाये आदमी को अगर
तो एक ग़म ही बहुत है संभालने के लिए

  - Aadarsh Dubey

Udasi Shayari

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