तू अगर बेवफ़ा नहीं होता
ज़िंदगी से गिला नहीं होता
हार जाता मैं ज़िंदगी से अगर
वक़्त पे तू मिला नहीं होता
मोजिज़े क्यूँ किसी के देखूँ मैं
इन निगाहों से क्या नहीं होता
ये बता कौन कह रहा तुझ से
आदमी तो ख़ुदा नहीं होता
इश्क़ दिल से अगर किया जाए
फिर कोई फ़ासला नहीं होता
सिर्फ़ चेहरा ही देख लेने से
आदमी का पता नहीं होता
हर किसी पर यक़ीं नहीं करते
हर कोई बा-वफ़ा नहीं होता
झूठ सौ बार बोलने से भी
सच कभी दूसरा नहीं होता
दिल अगर आईने-सा साफ़ रहे
कोई चेहरा बुरा नहीं होता
वक़्त पर साथ जो खड़ा न रहे
वो किसी का सगा नहीं होता
— Prashant Kumar














