"दौर-ए-जवानी"

इसी उम्र में जो भी करना है कर लो
इसी उम्र में तुम कि सज लो सँवर लो
नहीं उम्र फिर लौट कर आएगी ये
यही है समझ लो ख़ुदा का इशारा
मिलेगी नहीं ज़िंदगी फिर दुबारा

इसी उम्र में ऐश-ओ-आराम कर लो
इसी उम्र में चाहो तुम नाम कर लो
बहुत क़ीमती है जवानी का मौसम
इसी में है बरसात पतझड़ का मौसम
बहुत क़ीमती है ये दौर-ए-जवानी
न आएगी फिर लौट कर ये जवानी
मैं फिर कह रहा हूँ सभी से तिबारा
मिलेगी नहीं ज़िंदगी फिर दुबारा

इसी उम्र में सारे बच्चे बिगड़ते
इसी उम्र में सारे बच्चे सुधरते
अगर इस को चाहो तो सोना बना लो
अगर इस को चाहो खिलौना बना लो
ये पर्वत ये नदियाँ सभी पेड़ पौधे
सभी अपने पथ पर चले जा रहे हैं
ज़मीं आसमाँ कह रहे चाँद तारे
यही कह रहा है नदी का किनारा
मिलेगी नहीं ज़िन्दगी फिर दुबारा

— Prashant Kumar

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