"इंसान की दुनिया तो है इंसान नहीं है"
इंसान की दुनिया तो है इंसान नहीं है
कैसा भी मिरे दिल में अब अरमान नहीं है
हैवान हैं याँ सब कोई इंसान नहीं है
कैसा भी मिरे दिल में अब अरमान नहीं
जो कुछ भी बना हूँ मैं वो मेहनत से बना हूँ
दौलत से बना हूँ न सियासत से बना हूँ
हाँ मुझ पे किसी का कोई एहसान नहीं है
इंसान की दुनिया तो है इंसान नहीं है
पहचान बिना कोई तुझे काम न देगा
देगा भी कोई काम तो आराम न देगा
अपनी तो कहीं भी कोई पहचान नहीं है
इंसान की दुनिया तो है इंसान नहीं है
जो बात है हक़ की ये वही बात छुपाते
ये एक ही चेहरे में कई चेहरे लगाते
इन की तो तरफ़-दारी में भगवान नहीं है
इंसान की दुनिया तो है इंसान नहीं है
मुँह पे तिरे तेरी मिरे मुँह पे मिरी कहते
बाहरस ही अपने लगे अंदर से ये जलते
तुझ को अभी इंसान की पहचान नहीं है
इंसान की दुनिया तो है इंसान नहीं है















