प्रेम के दीप जलाओ तो बुझा देते हैं
आग नफ़रत की लगी हो तो हवा देते हैं
जानते हैं सो नहीं रखते वफ़ा की ख़्वाहिश
जिन से उम्मीद जुड़ी हो वो दग़ा देते हैं
उम्र भर पाँव की ज़ंजीर बने रह जाएँ
उन सभी रिश्तों को हम आग लगा देते हैं
हम को आता है सुख़न और अदाकारी भी
हम भी अश'आर से तस्वीर बना देते हैं
कितने ज़ाहिल हैं ये मजनूँ भी नई नस्लों के
शक्ल जो चूम नहीं पाते जला देते हैं
हम ने बचपन में कभी जिन से तमाचे खाए
अब वही हाथ हमें ख़ूब दुआ देते हैं
— Adesh Rathore















