है सज़ा चाहते रहना ये पता होता है
आदमी फिर भी मगर ज़िद पे अड़ा होता है
यार को इश्क़ से लाज़िम है रखो पहले तुम
यार महबूब से कुछ रोज़ बड़ा होता है
अपने बच्चे को दिखा कर वो मुझे कहती है
देख लो सब्र का फल इतना बड़ा होता है
क्या ग़ज़ब है कि तेरे इश्क़ के मारे हैं हम
क्या ग़ज़ब है कि तुझे इस का पता होता है
— Adesh Rathore















