महीने भर नहीं टिकता कोई इंसान है उस को
मैं कैसे मान लूँ अच्छे बुरे का ज्ञान है उस को
उसे महफूज़ भी रक्खा अज़िय्यत भी गवारा की
मैं उस पे शा'इरी करता हूँ ये वरदान है उस को
मुहब्बत भी है हम से ही है हम से ही बग़ावत भी
भरोसा भी हमीं पर ता-हद-ए-इम्कान है उस को
मेरा दिल दिल नहीं है है कोई लूटी हुई अस्मत
सो इस दिल पर हुकूमत भी बहुत आसान है उस को
खिलाड़ी अच्छा है शायद है उस का खेल भी अच्छा
सो लाज़िम है बधाई दे रहा कप्तान है उस को
— Adesh Rathore















