Adesh Rathore

Adesh Rathore

@adeshrathore01

Adesh Rathore shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Adesh Rathore's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm

मेरी आँखों में बस तेरी तस्वीर हो
फिर ख़ुदा चाहे जैसी भी तक़दीर हो

तुम हँसी हो ख़ुशी हो अलम हो मेरा
तुम जो कह दो तो ख़्वाबों की ताबीर हो

Adesh Rathore

रूह से वास्ता नहीं इसका
इश्क़ तो जिस्म की ज़रूरत है

मौत के बाद हम समझ पाए
ज़िंदगी कितनी ख़ूबसूरत है

Adesh Rathore

तोड़ने वाले तोड़ते होंगे
तुम भरोसा न तोड़ना देखो

मैं तुम्हारा हुआ गनीमत है
और तुम्हारा ही रह गया देखो

Adesh Rathore

करो किसी से बहाना-बाज़ी कि सच बताओ मेरी बला से
हमारे दिल से उतर चुके हो कहीं भी जाओ मेरी बला से

Adesh Rathore

हम से अच्छा लिखने वालों को जब मंच नहीं हासिल
हम कुछ अच्छा लिख लेंगे तो क्या अच्छा हो जाएगा

Adesh Rathore

वो जो आवारा थे वही लड़के
घर भी अब बेसबब नहीं जाते

Adesh Rathore

कहते हैं लड़कियों को सर-ए-राह छेड़कर
ये सब न हो ख़ुदाया मेरी बेटियों के साथ

Adesh Rathore

फ़क़त घर की ही याद आती है जब तब
वगरना कोई मुश्किल है नहीं अब

मुझे परदेस ने अपना लिया है
पिताजी आप चिंता मत करो अब

Adesh Rathore

हम बे-सबब उदास नहीं रहते बरमला
बाँटी गईं उदासियाँ हम शाइरों के बीच

Adesh Rathore

दुनिया के तानों से डरते आए हैं
जीते जी घुट घुट के मरते आए हैं

ख़्वाब ख़ुशी तक़दीर मुहब्बत हर शय से
हम समझौता ही तो करते आए हैं

Adesh Rathore

धोखे और ग़म मिले हुए हैं
उजड़ चुके हैं खिले हुए हैं

चीख रहा है जे़हन हमारा
होंठ किसी ने सिले हुए हैं

Adesh Rathore

बिछड़ बैठे हैं सूरत पर बिछड़ने का असर भी है
उदासी है मुसलसल है इधर भी है उधर भी है

Adesh Rathore

फूलों को चमन की चाह नहीं
ये इश्क़ फ़क़त इक राह नहीं

सब कुछ खोकर आए हैं हम
तुम भी जाओ परवाह नहीं

Adesh Rathore

वैसे तो दर-ब-दर नहीं हूॅं मैं
इतना भी बे-असर नहीं हूॅं मैं

सोचता हूॅं तुझे तो लगता है
क्यूॅं तेरा हमसफ़र नहीं हूॅं मैं

Adesh Rathore

है क्या तख़्लीक़ दुनियावी मुहब्बत
हज़ारों दर्द हैं चाबी मुहब्बत

अता की हैं ख़ुदा ने चार चीज़ें
मुहब्बत दर्द बेताबी मुहब्बत

Adesh Rathore

हमें भी गर सहूलत ख़ुदकुशी की दे अगर मौला
तो हम भी जिंदगी के जाल से आज़ाद हो जाऍं

Adesh Rathore

ज़रूरी है हमें मिलती रहे छाया बुज़ुर्गों की
नलों के पास ये फुलवार याँ बेहद ज़रूरी है

Adesh Rathore

हर तरफ शोर था मुनादी का
दिन करीब आ रहा था शादी का

था मेरी इब्तिदा-ए- बर्बादी
आखरी ख़्वाब था जो दादी का

Adesh Rathore

वैसे तो लोग आते जाते हैं
पर तिरे जैसे दिल को भाते हैं

हम ग़ज़ल फिर कभी बना लेंगे
चल तेरा बर्थडे मनाते हैं

Adesh Rathore

मेरे हमदम दिसंबर की नमी रातों में भी अक्सर
तुम्हारी याद आती है पसीने छूट जाते हैं

Adesh Rathore

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