ये दर्द-ए-दिल ये बेबसी ये मुश्किलात और
जो कुछ है उस पे चाहिए इक तेरा साथ और
हर दिन मैं उस को पूछता हूँ और कितने दिन
हर दिन वो मुझ से कहता है बस एक रात और
तो क्या तुम्हारी बात में कुछ ख़ास बात है
तो क्या तुम्हारे ज़ेहन की है नफ़्सियात और
इक दो मिनट की बात में घंटे लगा दिए
ये कहते कहते उस ने कि बस एक बात और
मिलने को तेरे बा'द भी लाखों मिले मगर
उन सबकी बात और थी और तेरी बात और
'आदेश' हम मिले ही न होते तो ठीक था
बिगड़ी है तुझ से मिल के मेरी जान बात और
— Adesh Rathore















