आ गया इश्क़ का घटाना बस
अब नहीं कुछ भी आज़माना बस
तुम नहीं आए मेरी ग़लती है
हम को आता नहीं बुलाना बस
तुम ने जो बोला हम ने मान लिया
वो हक़ीक़त हो या फ़साना बस
तुम ने भी हाँ यही तो सीखा है
अच्छे रिश्तों को काट खाना बस
सिर्फ़ अच्छे दिनों के साथी हो
तुम ख़ुशी और ये ज़माना बस
— Adesh Rathore















