
नहीं अब सब्र होता है हमें इतना रुलाती है
मैं उस को भूलना चाहूँ मगर वो याद आती है
उसे चाहा यही मैं ने हमेशा ख़ुश रहे लेकिन
तड़पती है वहाँ अफ़ज़ल यहाँ हम को सताती है
— Afzal Sultanpuri
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