"ग्लानि"
तुम से प्यार है मुझे
ये सिर्फ़ इज़हार था मेरा
कोई थोपा गया फ़ैसला नहीं
मेरे प्रेम को अस्वीकार कर
तुम ने कोई अपराध नहीं किया है
न ही मैं ने कोई अपराध किया है
तो
तो
तुम मेरे सामने बग़ैर किसी हिचकिचाहट
के आ सकती हो
ऐसे तेजी से भागने या
सर नीचे करने जैसी कोई बात नहीं है
तुम ऐसा करती हो तो
मैं ख़ुद को अपराधी पाता हूँ
और ग्लानि से भर जाता हूँ
तुम मुझे इस ग्लानि से बचा लो
अपना सर ऊँचा कर के
— Ajit Yadav














