AKASH
AKASH
Ghazal

और तो क्या है अच्छा मुझ

में
यादों का है दरिया मुझ
में

बा'द तुम्हारे रंज-ओ-ग़म ने
खोला है दरवाज़ा मुझ
में

मेरा चेहरा ज़ुल्फ़ें तेरी
ठहरा है इक लम्हा मुझ
में

सूरज से कहती है धरती
बहुत भरा है लावा मुझ
में

इक भोली सूरत वाली ने
किया है जादू टोना मुझ
में

— AKASH

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