बस ख़्वाब बेचता हूँ बनाता नहीं हूँ मैं
लेकिन ये बात सब को बताता नहीं हूँ मैं
दुनिया से मुझ को इतनी मोहब्बत ज़रूर है
बारिश में भीगता हूँ नहाता नहीं हूँ मैं
करता नहीं हूँ याद किसी को मलाल में
ऐसी हवा में फूल खिलाता नहीं हूँ मैं
अब तेरा खेल खेल रहा हूँ मैं अपने साथ
ख़ुद को पुकारता हूँ और आता नहीं हूँ मैं
बस रौशनी समझ के मुझे राख हो गया
वो ये समझ रहा था जलाता नहीं हूँ मैं
आसाँ नहीं हैं मेरी अज़िय्यत के दाव-पेंच
मरता हूँ और जान से जाता नहीं हूँ मैं
'मासूम' बे-क़रारी है मेरे ख़मीर में
उड़ती है मेरी ख़ाक उड़ाता नहीं हूँ मैं
— Akbar Masoom















