is tarah ham tumhaara asar dekhte ye haseen lab ye zulfen nazar dekhte | इस तरह हम तुम्हारा असर देखते ये हसीं लब ये ज़ुल्फ़ें नज़र देखते

  - Ankit Yadav

इस तरह हम तुम्हारा असर देखते ये हसीं लब ये ज़ुल्फ़ें नज़र देखते
शहरस जब तुम्हारे गुज़रते कभी तो तुम्हारी गली ख़ासकर देखते

ऐ सखी बे-तहाशा मोहब्बत तिरी मुझको हर रस्म से मावरा थी मगर
'उम्र तन्हा बिताने से अच्छा ये था तुम सफ़र में कोई हम-सफ़र देखते

ना-मुकम्मल सभी ख़्वाब हैं आज तक फिर भी बस एक दिल की ख़ुशी के लिए
चश्म-ए-हैराँ से बुनते किसी ख़्वाब को फिर उसी ख़्वाब को रात भर देखते

पेड़ है इक लगाया तिरे नाम का फूल हैं इसके बिल्कुल तिरे रंग के
तू नहीं है तो क्या हम तिरी याद में मर भी जाते अगर गुल-मोहर देखते

  - Ankit Yadav

Gulshan Shayari

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