
बबूलों में किसी उलझे बदन सी होने लगती है
जो तेरे बिन कोई छू ले चुभन सी होने लगती है
बिना तन्हाई के इक पल रहा जाता नहीं मुझ से
किसी से बात कर लूँ तो घुटन सी होने लगती है
— Aman Mishra 'Anant'
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