आप को पहले मेरा उनवान दे देता हूँ
पास आने पर मेरे नुक़सान दे देता हूँ
सीखना हो गर तसल्ली का हुनर तुम को तो
एक दिन ख़ातिर तुम्हें ये कान दे देता हूँ
फूल चेहरा सुर्ख़ लब ज़ुल्फ़ें हया आँखों में
बेवफ़ाओं की तुम्हें पहचान दे देता हूँ
लाज़मी भी है नज़र-अंदाज़ होना मेरा
कुछ ज़ियादा मैं सभी पर ध्यान दे देता हूँ
देखता हूँ ख़्वाब पहले जिस इमारत के मैं
फिर उसी से कूद कर मैं जान दे देता हूँ
— Aman Deep singh















