कहाँ सीता बिना है राम की दुनिया
कहाँ राधा बिना है श्याम की दुनिया
तुम्हारी ही तरह इक ख़ूब-सूरत सी
बनानी है तुम्हारे नाम की दुनिया
ज़ियादा कुछ नहीं बस चाहता हूँ इक
तुम्हारे साथ सुब्ह-ओ-शाम की दुनिया
तुम्हारे बा'द जीना ही नहीं मुझ को
तुम्हारे बा'द ये किस काम की दुनिया
— Aman Deep singh















