मेरे इन सवालों की बात कौन करता है

ग़मज़दा ख़यालों की बात कौन करता है

उस की काली ज़ुल्फ़ों पर लोग मिसरे पढ़ते हैं
मेरे झड़ते बालों की बात कौन करता है

उस के गाल के गड्ढे जान लेते हैं सबकी
मेरे सूखे गालों की बात कौन करता है

गोरे हुस्न के उस के शहर भर में चर्चे हैं
हम अजीब कालों की बात कौन करता है

लोग चाभियों जैसे ध्यान रखते हैं उस का
हम अकेले तालों की बात कौन करता है

लोग बात करते हैं काम काज वालों की
दाद वाद वालों की बात कौन करता है

— Aman Deep singh

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