जागता हूँ तीरगी मेंनींद आती रौशनी मेंपागलों सा हो गया हूँरो रहा हूँ मैं ख़ुशी मेंये बदन ये रूह दोनोंलड़ गए हैं साथ ही मेंमुझ को रख लो पास अपनेपास अपनी चाकरी मेंहारना है आज भी परजीत होगी आख़िरी मेंआप चारा-गर हैं मेरेसाथ देना बेबसी में— Amar