ये इश्क़ मोहब्बत की इतनी सी कहानी है
तुम प्यार नहीं करते बस प्यास बुझानी है
तुझ से ही शुरू मेरी और ख़त्म कहानी है
गर तू न मिला मुझ को बर्बाद जवानी है
अब भी मुझे लगता है वो लौट के आएगा
उस के ही ख़यालों में ये उम्र बितानी है
उपहार मोहब्बत में तू ने जो दिए मुझ को
उन सब को इकट्ठा कर अब आग लगानी है
हम मिल तो गए हैं पर हम मिल भी नहीं सकते
जो रस्म यही है तो ये रस्म निभानी है
— Ambar















