Ambar
Ambar
Ghazal

ये इश्क़ मोहब्बत की इतनी सी कहानी है

तुम प्यार नहीं करते बस प्यास बुझानी है

तुझ से ही शुरू मेरी और ख़त्म कहानी है
गर तू न मिला मुझ को बर्बाद जवानी है

अब भी मुझे लगता है वो लौट के आएगा
उस के ही ख़यालों में ये उम्र बितानी है

उपहार मोहब्बत में तू ने जो दिए मुझ को

उन सब को इकट्ठा कर अब आग लगानी है
हम मिल तो गए हैं पर हम मिल भी नहीं सकते

जो रस्म यही है तो ये रस्म निभानी है

— Ambar

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