ab iske siva koi chaara nahin | अब इसके सिवा कोई चारा नहीं

  - Ambar

अब इसके सिवा कोई चारा नहीं
मुहब्बत करेंगे दुबारा नहीं

बहुत आया ग़ुस्सा था तुझपे मगर
मना शुक्र तुझको मैं मारा नहीं

हो जितनी भी मुझ
में सहनशीलता
तेरा रूठ जाना गवारा नहीं

इक अरसे तलक मैं रहा मुंतज़िर
तुम्हीं ने था मुझको पुकारा नहीं

ज़मीं छोड़ने पे था मजबूर मैं
है कौन अपनी माँ का दुलारा नहीं

नहीं टूट सकता करूँँ क्या सनम
कि अंबर हूँ यारा मैं तारा नहीं

  - Ambar

Mehboob Shayari

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