दे तू सकता वफ़ा नहीं मुझको
ख़ैर कोई गिला नहीं मुझको
तेरे बस की नहीं रही ये बात
जानता हूँ बता नहीं मुझको
मैं नहीं डरता तेरी आँखों से
आँखें अपनी दिखा नहीं मुझको
हँसते हँसते कहीं न रो जाऊँ
याद उसकी दिला नहीं मुझको
चाहने से मुझे है लगता डर
जिसको चाहा मिला नहीं मुझको
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