vo maarka ki aaj bhi sar ho nahin sakaa | वो मारका कि आज भी सर हो नहीं सका

  - Ameer Imam

वो मारका कि आज भी सर हो नहीं सका
मैं थक के मुस्कुरा दिया जब रो नहीं सका

इस बार ये हुआ तिरी यादों की भीड़ में
हर गाम ख़ुद को मिल गया मैं खो नहीं सका

जागा हूँ गहरी नींदस लेकिन अजीब बात
ये लग रहा है जैसे कि मैं सो नहीं सका

उग आई घास 'इश्क़ के मलबे पे हर तरफ़
हम दोनों में से कोई उसे धो नहीं सका

जादू-नगर है कोई मिरा अंदरूँ जहाँ
होता रहा है वो जो कभी हो नहीं सका

  - Ameer Imam

Valentine Shayari

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