यही बहुत है कि दिल उसको ढूँढ लाया है
किसी के साथ सही वो नज़र तो आया है
करूँँ शिकायतें तकता रहूँ कि प्यार करूँँ
गई बहार की सूरत वो लौट आया है
वो सामने था मगर ये यक़ीं न आता था
वो आप हैं कि मेरी ख़्वाहिशों का साया है
अज़ाब धूप के कैसे हैं बारिशें क्या हैं
फ़सील-ए-जिस्म गिरी जब तो होश आया है
मैं क्या करूँँगा अगर वो न मिल सका 'अमजद'
अभी अभी मेरे दिल में ख़याल आया है
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