seeche ga.e jo zakham davaa se nikhar ga.e | सींचे गए जो ज़ख़्म दवा से निखर गए

  - Amulya Mishra

सींचे गए जो ज़ख़्म दवा से निखर गए
ख़ाली हमारे दर से सभी चारागर गए

मुश्किल है मेरे दिल में तिरे ग़म को ढूँडना
सागर में ऐसे कितने ही दरिया उतर गए

मैं इस लिए भी दौड़ में आगे निकल गया
मेरे हरीफ़ वक़्त से पहले ठहर गए

आई ख़िज़ाँ तो 'इश्क़ के मा'नी पता चले
पत्तों के साथ शाख़ों से कुछ फूल झड़ गए

लड़कों को लग रही थी मोहब्बत हसीन शय
मेरी मिसाल दी गई सारे सुधर गए

जैसे नदी का हश्र समुंदर में गिरना है
वैसे ये सानहे सभी मुझ पर गुज़र गए

तुम ही नहीं गए हो मुझे छोड़ कर 'अमूल्य'
जाओ तुम्हारे जैसे कई लोग मर गए

  - Amulya Mishra

haseen Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Amulya Mishra

As you were reading Shayari by Amulya Mishra

Similar Writers

our suggestion based on Amulya Mishra

Similar Moods

As you were reading haseen Shayari Shayari