Rehaan
Rehaan
Nazm

"बद-दुआ"

हर ख़ता की सज़ा आशिक़ी को मिले
बेबसी इस-क़दर ज़िन्दगी को मिले
रूठ जाएँ सभी दोस्त तुझ से तेरे
दिल-लगी के करम दोस्ती को मिलें
साँस हैराँ भी हो आँख भी नम रहे
रास्ते सैकड़ों बे-ख़ुदी को मिलें
ज़िन्दगी में कहीं दौर ऐसा भी हो
छोड़ दें सब तुझे जिस किसी को मिले
दिल तड़पता रहे रात-दिन याद में
हिज्र का फ़ाइदा मय-कशी को मिले
याद आएँ तुझे भी सितम फिर तेरे
हर सितम लौट के जब तुझी को मिले
तू जहाँ भी रहे हो परेशानियाँ
फिर बहाना कोई ख़ुद-कुशी को मिले
पास 'रेहान' के कोई क़िस्सा हो फिर
दास्ताँ इक नई शा'इरी को मिले

— Rehaan

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