"मासूम ख़ून"
जिन आँखों से ख़ुशी बहती थी उन
में ख़ौफ़ भर डाला
मेरे हाथों ने इक मासूम बच्चा क़त्ल कर डाला
वो हँसता था हँसाता था सभी को और मुझ को भी
ज़माने की न कोई फ़िक्र वो सबका दुलारा था
वो इक बच्चा मुझे सारे जहाँ में सब से प्यारा था
थी क्या ही उम्र उस की था अठारह का अभी बस वो
वो मेरा चाँद था लेकिन लगा मुझ को अमावस वो
उसे कुछ और दिन जीना था हँसना-खेलना था पर
मेरे बेज़ार दिल ने बचपना उस का कुतर डाला
मेरे हाथों ने इक मासूम बच्चा क़त्ल कर डाला
मुझे जब मेरी ही नाकामियाँ डसने लगी इक दिन
अचानक तब मुझे उस की ख़ुशी चुभने लगी इक दिन
किया सौदा फिर उन नाकामियों का उस की ख़ुशियों से
सभी नाकामियों का बोझ मैं ने उस के सर डाला
मेरे हाथों ने इक मासूम बच्चा क़त्ल कर डाला















