"सुनो शादी मुबारक हो"

सुनो शादी मुबारक हो दुल्हन तो बन चुकी हो अब
बता भी दो कि सुनने को वो ख़ुश-ख़बरी मैं आऊँ अब

किसी दिन छोड़ जाएगी तेरे बेटे को कोई जब
किसी आशिक़ की माँ का दुख समझ पाए तू शायद तब

इसे इंसाफ़ कहते हैं इसी से भागते हैं सब
इसी को पूजता हूँ मैं इसी से काँपते हैं रब

मगर तब तक मुनासिब है तड़प को बोलना करतब
सुनो शादी मुबारक हो दुल्हन तो बन चुकी हो अब

— Anant Gupta

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