
जिसे देखा नहीं उस के सहारे साथ चलते हैं
मैं दरिया में उतरता हूँ किनारे साथ चलते हैं
तुझे इक ख़्वाब की ताबीर से लगने लगा है डर
यहाँ हर रोज़ ऐसे ही ख़सारे साथ चलते हैं
— Ansar Eatvi
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