लहरों ने टूटी कश्ती को कमतर समझ लियाअच्छा हुआ कि कश्ती ने तेवर समझ लियाजिस दाम जिस ने चाहा उसी दाम में रखामुझ को किसी गरीब का ज़ेवर समझ लिया— Ansar Eatvi