क्या ख़बर किस कैफ़ियत में मुब्तिला हूँ
लग रहा है आप अपना मर्सिया हूँ
ढूंढ़ता हूँ किस के क़दमों के निशाँ मैं
कौन है? किस तक पहुँचना चाहता हूँ
मैं ने ही कुन बोल कर दुनिया बनाई
और इस दुनिया का पर्दा हो गया हूँ
अशरफ़-उल-मख़लूक़ जो ठहरा दिया था
यूँ कि मैं इक मोजिज़े पर मोजिज़ा हूँ
लफ़्ज़ अपनी ज़ात में ज़ाहिर हैं फिर भी
जाने क्यूँ इन के मआ'नी ढूँढ़ता हूँ
सबके अंदर है ख़ुदा कहते हैं मुर्शिद
या'नी मुर्शिद भी ख़ुदा,मैं भी ख़ुदा हूँ?
सिर्फ़ इतना फ़र्क़ है दोनों में "ग़ाफ़िल"
वो है इक फ़रमान और मैं इल्तिज़ा हूँ
— Ansh Ghafil















